Saturday, May 16, 2020

प्रवासी मजदूरों का पेट भरने की एक दिव्य कोशिश

  एक दिव्य कोशिश और वूमेन आर्मी लखनऊ  की तरफ से भूखे प्यासे लाखों की तादाद में सड़कों पर उतरे हुए प्रवासी मजदूरों के लिए  खाने पीने की व्यवस्था में सहयोगकिया गया! आज सुबह 6: 00 बजे0कामता चौराहा से वितरण आरंभ किया गया सामग्री

वितरण में लस्सी, मट्ठा, पानी, बिस्किट, लैया चना, केले, खीरा ,बंद, रश्क आदि वितरित किया गया आज के वितरण में एक दिव्य कोशिश की चेयर पर्सन वर्षा वर्मा मैं अध्यक्ष दीपक महाजन जी वूमेन आर्मी से अध्यक्ष ओम कुमारी सिंह रश्मि सिंह उनके पति विश्वजीत मिश्रा एकता खत्री जी चौक के समाजसेवी गौरव गुप्ता जी और उनके एक अनाम मित्र  एक हमारे फेसबुक मित्र अंकुर मेरी योग शिष्य चंदा तिवारी और उनके हस्बैंड अवधेश तिवारी जी मौजूद थे आज के खाने

 पीने के सामान वितरण में 11000 का सहयोग राकेश महाजन जी पठानकोट जम्मू से₹10000 का सहयोग श्रद्धा पांडे जी अध्यापिका और लेखिका दिल्ली की तरफ से किया गया था मेरी योग शिष्य चंदा तिवारी जी और कांस्टेबल अखिलेश सिंह की तरफ से 4 क्रेटकेला

चौक के समाजसेवी हमारे छोटे भाई गौरव गुप्ता और उनके मित्र की सौजन्य से 30 दर्जन केला और चार बोरी खीरे का सहयोग किया गया Civil Hospital के पैथोलॉजी डिपार्टमेंट में काम करने वाली मधुलिका जी की तरफ से 500 बोतल पानी का सहयोग किया गया आप भी ईश्वरीय कार्य सहयोग कर लाखों मजदूरों के भूख प्यास मिटाने में से भागी बन सकते हैं किसी भी वास्तविक सच्ची सेवा के लिए संपर्क करें एक दिव्य कोशिश चेयर पर्सन वर्षा वर्मा 831 819 3805 अध्यक्ष दीपक महाजन 9450 111 567

लॉकडाउन के दौरान शिक्षण संस्थानों से बेहतर शिक्षा कैसे दी जाये

यह तो सर्वविदित है कि ‘‘कोरोना’’ महामारी रूपी  आज समूचा विश्व डरा और सहमा हुआ है इसकी भयावहता से भी इन्कार
नहीं किया जा सकता किन्तु किसी भी परिस्थिति में जीवन सरिता के बहाव में अधिक समय तक ठहराव की स्थिति स्वीकार्य नहीं होती । यह भी एक शाश्वत सत्य है। ठहरा हुआ पानी दूषित और अप्रयोज्य होने में अधिक समय नहीं लेता। अतः आपसे निवेदन है कि कतिपय सावधानियां और सुरक्षा उपायों के साथ अन्य औद्योगिक/व्यवसायिक/पेशेवर संस्थानों की भांति शिक्षण संस्थानों को भी बिना छात्रां के एक तिहाई स्टॉफ टीचिंग/नॉन टीचिंग को स्कूल आने की अनुमति प्रदान करने का कष्ट करें।
जिस प्रकार बिना नींव के कोई भी इमारत भले ही वह कितनी भी सुन्दर एवं आकर्षक हो परन्तु टिकाऊ नहीं हो सकती एवं विषम परिस्थितियों का एक थपेडा भी उसे तहस-नहस करने के लिए पर्याप्त है। उसी प्रकार बिना शिक्षण के हमारा भावी समाज पंगु बनकर रह जायेगा। हालॉकि इस परिप्रेक्ष स्कूलों द्वारा में ऑन-लाइन शिक्षण कार्य कराया जा रहा है। यद्यपि स्कूलां में बिना छात्रों के कुल स्टॉफ का एक तिहाइ स्टॉफ उपस्थित होकर काम करें तो निम्न समस्याओं का समाधान हो सकता है :-
1- शिक्षकों के घर पर संसाधनों की अपेक्षाकृत कमी के चलते अपेक्षित परिणाम प्राप्त नहीं हो पा रहे है। उपस्थित टेक्निकल स्टॉफ एवं सबजेक्ट विशेषज्ञ शिक्षक वर्क एट होम पर कार्यरत शिक्षकों को टेक्निकल/शैक्षणिक/सोफ्टवेयर स्पोर्ट दे सकेंगे जिससे छात्रों को बेहतर शिक्षा दी जा सकें। 
2- ऑनलाइन लाइव क्लास में इंटरनेट स्पीड़ और नेटवर्क जैसी समस्या उत्पन्न हो रही है। जिस कारण बच्चां व शिक्षकों की विड़ियों सफरिंग करते हुए बीच में ही रूक जाती है। अनेक शिक्षकों के पास इन्टरनेट तो है पर वाई-फाई नहीं है, मोबाइल डाटा पर्याप्त कार्य नहीं कर पाता शिक्षक को 10 मिनट की विडियों बनाने में एक से डेढ जीबी डेटा लग जाता है। स्कूलों में पहले से ही फास्ट वाई-फाई उपलब्ध है जिससे यह समस्या हल हो जाती है।
3- जो अध्यापक ट्रेनिंग के अभाव में ऑनलाइन एजुकेशन नहीं करा पा रहे हैं। उन्हें तिहाई स्टॉफ उपस्थिति के अर्न्तगत स्कूल बुलाकर, स्कूल द्वारा ऑनलाइन एजुकेशन की ट्रेनिंग दी जायें, तो उनके लिए ऑनलाइन पढ़ाना सम्भव हो जायेगा।
4- स्कूल की लाइब्रेरी में सभी विषयों की विशेषज्ञ पुस्तके उपलब्ध रहती है उपस्थित एक तिहाई शिक्षकां की मदद से ऑनलाइन शिक्षा दे रहे शिक्षक, पुस्तकालय में उपलब्ध पुस्तकों की सहायता से ऑनलाइन शिक्षा अधिक अच्छी करा सकेंगे।
5- विद्यालय में कम्प्यूटर, लैपटाप, प्रोजेक्टर, प्रिन्टर एवं सोफ्टवेयर से सम्बन्धित सुविधाएं भी होती है। इनके प्रयोग से छात्रां को शानदार ऑनलाइन क्लास प्रदान की जा सकती है जबकि घर पर शिक्षकों के पास केवल मोबाइल फोन है जिससे पूर्ण क्लास चलाना मुश्किल है।
6- घर से विड़ियों बनाते समय कैमरा हिलता रहता है एवं कैमरा/मोबाइल की क्वालिटी भी उतनी अच्छी नहीं होती है, जिससे विद्यार्थी को व्यवधान उत्पन्न होता है । लगभग सभी स्कूलों के 5 कमरों से 30 कमरों तक में पूर्व से ही स्मार्ट क्लास है वहां केमरा, प्रोजेक्टर, सोफ्टवेयर, व्हाइट बोर्ड आदि परिपूर्ण है अर्थात् ऑनलाइन क्लास का पूरा इन्फ्रास्टक्चर तैयार है बस शिक्षक को क्लास रूम में जाना है और ऑनलाइन शिक्षा शुरू हो जाती हैं।
7- ऑनलाइन क्लास में घर पर रोशनी की भी समस्या होती है जितना प्रकाश ऑनलाइन क्लास/विडियों रिकार्डिंग में आवश्यक होता है ऑनलाइन क्लास के लिए वह पर्याप्त मात्रा में नहीं मिलता, जिस कारण बच्चों को स्पष्ट दिखाई नहीं देता जबकि स्कूल में प्रकाश व्यवस्था आवश्यकतानुसार बनाई जा सकती है । 
8- शिक्षक स्कूल में फ्री माइंड होकर अच्छी आवाज के साथ पढ़ा सकते है, घर पर शिक्षक आवाज के साथ नहीं पढ़ा सकते क्योंकि सभी परिवार के साथ रहते हैं। कमरा बन्द करने से आवाज गूंजने लगती है।  घर पर कुछ घर वालां का व कुछ आस-पास वालों की आवाज आती रहती है, जो बच्चों को पढ़ाने में समस्या उत्पन्न करती है। शिक्षक का मन स्थिर नहीं रहता है जिस कारण गलती होने की संभावना बढ़ जाती है। स्कूल में बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई के लिए शिक्षकां को शान्त वातावरण मिलेगा।
9- लेंगवेज जैसे विषय को जैसे- हिन्दी, अंग्रेजी, संस्कृत आदि को मोबाइल को कहीं पर भी ले जाकर पढ़ा सकते है लेकिन गणित, फिजिक्स/केमेस्ट्री/बॉयोलाजी/कम्प्यूटर जैसे विषय बिना बोर्ड के पढाना मुश्किल है। बोर्ड पर ही वह हर फॉर्मेट को और सवालों को आसानी से समझा सकते है।
10- बच्चें किन्ही कारणवश ऑनलाइन क्लासेज नहीं ले पा रहे हैं, उनके लिए उपस्थित एक तिहाई अध्यापक लिखित नोट्स तैयार कर सकते हैं, जिन्हें बाकी उपस्थित क्लेरिकल स्टॉफ के माध्यम से बच्चों के घर भेजा जा सकता है।
उपरोक्त सभी कार्यो के लिए विद्यालय में अध्यापकों की उपस्थिति की अति आवश्यकता है। परन्तु कोरोना वायरस के फैलाव को देखते हुए विद्यालय में 100 प्रतिशत स्टॉफ मौजूद रहना भी उचित नहीं है। लगभग सभी विद्यालयों में शिक्षक-कमरा 2 : 1 के अनुपात में है। अतः विद्यालय में एक तिहाई स्टॉफ की मौजूदगी से टीचर्स कम कमरे ज्यादा होगे इससे सभी टीचर्स अलग-अलग कमरों में ये सब कार्य कर सकते हैं। जिससे कि छात्रों की शिक्षा व्यवस्था भी बाधित न हो और सरकार के निर्देशों का भी पालन किया जा सकें और कोविड-19 को फैलने से रोका जा सकें । 
भवदीय,
(अरविन्द संगल)
चेयरमैन,
सेन्ट आर. सी. ग्रुफ ऑफ एजुकेशनल इंस्टीटयूट शामली

Friday, May 15, 2020

विनोद सेन निवासी माजरा रोड शामली को संगठन में जिलाध्यक्ष पद पर मनोनीत किया है

 आज दिनांक 15 मई 2020 को भारतीय अनुसूचित जन जागृति समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष अरविंद झंझोट ने सेन समाज में अपनी विशेष भूमिका निभाने वाले जन समाजसेवी विनोद सेन निवासी माजरा रोड शामली को संगठन में जिलाध्यक्ष पद पर मनोनीत किया है और जिला संयोजक पद पर सुरेश चंद निवासी शांति नगर जनपद शामली को मनोनीत किया है इनसे आशा व्यक्त करते हुए कहां है कि दलित पिछड़ा वर्ग जन समाज को अपने हकों के प्रति जागरूक करने एवं उनके उनके हक अधिकार दिलाने का प्रयास करेंगे और संगठन को मजबूती प्रदान करेंगे भवि दय अरविंद झंझोट मोबाइल नंबर 94 57 77 1639

सम्राट इंटर कॉलेज की छात्राओं द्वारा घर मे मास्क बनाकर ज़िला विद्यालय निरीक्षक को किए भेट

मुजफ्फरनगर
सम्राट इंटर कॉलेज मिमलाना रोड मुज़फ्फरनगर  की छात्राओं द्वारा किया गया सराहनीय प्रयास। लॉक डाउन का पालन करते  हुए घर मे रहकर 170 मास्क बनाकर ज़िला विद्यालय निरीक्षक मुज़फ्फरनगर को भेंट किए।
लॉक डाउन की स्थिति में सम्राट इंटर कॉलेज की छात्राओं ने अपनी अध्यापिकाओ के मार्गदर्शन पर 170 फेस मास्क बनाएं।बच्चों ने डिजाइनर व 3 लेयर फेस मास्क बनाएं और फेस मास्क बनाकर प्रधानाचार्य डॉ. अरशद सम्राट के द्वारा ज़िला विद्यालय निरीक्षक महोदय को भेट किए। कक्षा -12 की जुवेरिया ने सामाजिक दूरी का पालन करते हुए लोगों को यह भी समझाया की कोविड-19 से बचने के लिए क्या - क्या सावधानियां बरतनी चाहिए ।साथ ही कक्षा 11 की छात्रा नज़राना ने मास्क पहनने को आवश्यक बताया। जुवेरिया, मुस्कान, शगूफा, आयशा, ज़ारा, इरम, आदि छात्राओं ने यह अनुभव  व्हाट्सएप के माध्यम से अपनी अध्यापिकाओ के साथ भी साझा किए। छात्राओं को अन्य लोगों को जागरूक करने में प्रधानाचार्य डॉ. अरशद सम्राट, इरफाना अंजुम,शगूफा नाज़, मो. आसिफ, फातिया नाज़,अलीशा का सहयोग रहा।
*ज़िला विद्यालय निरीक्षक श्री गजेंद्र कुमार ने* बच्चों के इस सराहनीय प्रयास पर मुक्त कंठ से प्रशंसा की एवं कहा कि  सम्राट इंटर कॉलेज, मिमलाना रोड, मुज़फ़्फ़रनगर के प्रधानाचार्य मोहम्मद अरशद जी द्वारा हमें बच्चों द्वारा तैयार 170 मास्क उपलब्ध कराये गए। हम प्रधानाचार्य जी, सभी शिक्षकों तथा सभी बच्चों का आभार व्यक्त करते हैं।

सृजन फाउंडेशन के हिम्मत अभियान के अंतर्गत चल रहे माहवारी स्वच्छता जागरूकता अभियान के 15वें दिन महिलाओं ने पीरियड्स को लेकर अपने विचार बहुत ही नए अंदाज में व्यक्त किए। जो विषय अभी तक फुसफुसाहट भरा था वह अब खुलकर सामने आ रहा है और महिलाएं तथा बच्चियां इस विषय पर खुलकर बोल पा रही हैं

वंदना शुक्ला ने महावारी को लेकर अपने विचार इस प्रकार व्यक्त किए- *यह लाल रक्त कोई पाप नहीं, यह लाल रक्त कोई अभिशाप नहीं, इससे बड़ा कोई वरदान नहीं. प्राउड टू बी ए वीमेन*

स्नेह बिंदल ने लिखा- *महावारी की पीड़ा कम हो जाती है जब दुनिया हमें अशुद्ध नहीं बुलाती है. अगर हमारे जिस्म से ना बहता यह लहू तो बता ए इंसान कहां से आता इस जहां में तू. मेरे रक्त के निशान मेरी संपूर्णता की निशानी हैं, मेरे जज्बे मेरी हिम्मत पर खुदा को भी हैरानी है।*

गीता पांडे ने *महावारी के समय यदि स्कर्ट पर लाल धब्बा आ जाए तो उस पर अपने विचार व्यक्त किए कि उस पर तुरंत लोगों की नजर पड़ जाती है और लोग उसको मजाक के रूप में लेते हैं।*

सृजन फाउंडेशन के हिम्मत अभियान के अंतर्गत चल रहे माहवारी स्वच्छता जागरूकता अभियान के 14 दिन युवा वर्ग ने पीरियड्स को लेकर अपने विचार व्यक्त किए

नेहा ने PMS (प्रेमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम) को लेकर यह संदेश दिया की हमको शर्म करने की जरूरत नहीं है। उस वक्त सभी महिलाऐं परेशानियों में होती हैं तो उनकी परेशानियों को समझना चाहिए और महिलाओं को भी अपने पीरियड्स पर गर्व होना चाहिए।

दसवीं क्लास की छात्रा मीथिका ने यह संदेश दिया की पीरियड पर हम को शर्म नहीं करनी है यह हमारे अस्तित्व का कारण है तो फिर इससे शर्माना कैसा?

शालिनी ने पीरियड्स को लेकर अपने विचार इस प्रकार व्यक्त किये- लाल रंग योद्धा का प्रतीक है,
एक योद्धा जो मां की कोख में पलता है, वह शुरवीरता धारण कर मनुष्य को जन्म देती है और इस तरह वह अनुक्रम को बढ़ाती है!

हिम्मत अभियान प्रमुख डॉ अमित सक्सेना ने बताया यह खुशी की बात है इस अभियान में सभी वर्ग के लोग बढ़ चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं चाहे वह स्कूल में पढ़ने वाली बच्चियां हों चाहे वह मेनोपॉज के दौर में पहुंच चुकी महिलाएं। सभी ने इस अभियान को सराहा है और अपने विचार निरंतर व्यक्त कर रहे हैं।

Thursday, May 14, 2020

सिल्वर बैल्स पब्लिक स्कूल के बाहर पानीपत से पैदल चलकर आए जनपद बदायूँ ,शाहजहांपुर और गया के लगभग 100 प्रवासी मज़दूर राह में आराम करते मिले

आज प्रातः सिल्वर बैल्स पब्लिक स्कूल के बाहर पानीपत से पैदल चलकर आए जनपद बदायूँ ,शाहजहांपुर और गया के लगभग 100 प्रवासी मज़दूर राह में आराम करते  मिलें।
मौक़े पर पहुँचे CDO शामली द्वारा सभी को उनके गृह ज़िले तक बसों से पहुँचाने का प्रबंध किया जा रहा है ।

सभी मज़दूरों को स्कूल में ठहरा कर ठंडा,केले वितरण और भोजन कराया गया।साथ मे सभी को मास्क वितरण व प्रति व्यक्ति 1 पैकिट जिसमे चने भुने,मुरमुरे,मीठी खील,नुक़दी व रेवड़ी वितरित किया गया

जिसमे मुख्य रूप से प्रमुख समाजसेवी चैयरमैन अजय संगल सिल्वरबैल्स परिवार,अतुल बंसल,अरुण बंसल,अनिल गोयल,मानस संगल,अनिल उपाध्याय, निशिकान्त संगल,मनीष नामदेव,आकाश गोयल,अमित प्रजापति रविकांत गर्ग आदि लोग उपस्थित रहे